Solar Subsidy and loan for Agriculture: रूफटॉप और कृषि के लिए ऋण योजनाएं

Solar Subsidy and loan for agriculture: जैसा की हम जानते हैं कि सरकार द्वारा देश के हर वर्ग के नागरिकों एवं हर तरह के क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों के लिए समय – समय पर कई तरह की Sarkari Yojana चलाई जाती हैं। इसी तरह से भारत सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और सिंचाई के लिए स्रोत प्रदान करने और कृषि क्षेत्र को डी-डीजलाइज करने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाभियान (PM KUSUM Scheme) योजना शुरू की गई थी।

इस योजना को मार्च 2019 में अपनी प्रशासनिक स्वीकृति मिली और जुलाई 2019 में योजना के तहत कुछ दिशानिर्देश तैयार किए गए। यह योजना नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा देशभर में सौर पंप और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करने के लिए आरम्भ की गई थी।

Solar Subsidy and loan for Agriculture

Loan/Subsidy प्राप्त करने का तरीका

यहाँ हम Solar PV system खरीदने की प्रक्रिया बता रहे हैं और साथ ही NABARD की सहायता से Loan/Subsidy प्राप्त करने का तरीका भी बता रहे हैं।

  • सबसे पहले तो आपको Solar PV system के विश्वसनीय निर्माता या आपूर्तिकर्ता को चुनना होगा और साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि निर्माता को MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय) द्वारा अप्रूवड होना चाहिए।
  • कुछ विशिष्ट मॉडल हैं जिन्हें MNRE द्वारा अप्रूवड किया गया है, जिन्हे योजना के तहत योग्य माना गया है। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया जाना चाहिए कि NABARD द्वारा बताए गए Solar PV system की बेंचमार्क लागत कुल 270 रुपये प्रति डब्ल्यूपी है। इसके अलावा आपको अपने आपूर्तिकर्ता से सलाह करके समय-समय पर संशोधित इकाई लागतों के बारे में अपडेट रहना होगा।
  • अगर बेंचमार्क लागत यूनिट की लागत से अधिक है तो ऐसी परिस्थितियों में कुल 40% सब्सिडी का दावा किया जा सकता है। हालांकि, नाबार्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार, अगर यूनिट लागत बेंचमार्क लागत से अधिक होती है, तो पूंजीगत सब्सिडी की अधिकतम राशि पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी।
  • जानकारी के अनुसार कुछ व्यक्तियों के समूह जिनमें स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), गैर सरकारी संगठन और किसान क्लब शामिल हैं, NABARD के माध्यम से ऋण ले सकते हैं। यह subsidy सार्वजनिक या निजी लिमिटेड कंपनियों के लिए उपलब्ध नहीं है।
  • इसके साथ ही सब्सिडी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति का खाता किसी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या वाणिज्यिक बैंक में होना चाहिए। आवेदक इसके लिए किसी राष्ट्रीयकृत सार्वजनिक बैंक से भी संपर्क परामर्श ले सकते हैं।
  • कुल लागत का 60% बैंक ऋण के लिए पात्र है, जबकि शेष 40% की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। RBI के मानदंड लाभार्थी द्वारा भुगतान किए जाने वाले मार्जिन को तय करते हैं। RBI द्वारा निर्धारित की गयी ब्याज दरों के हिसाब से आप 5 साल के अंदर ऋण चुका सकते हैं।
  • आपको बैंक में विक्रेता द्वारा दिए गए कोटेशन और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इन आवश्यक दस्तावेजों में MNRE approval form, परियोजना प्रस्ताव, टिन नंबर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं जिन्हें बैंक को जमा करवाना अनिवार्य होता है।
  • सभी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होने के बाद, बैंक लोन की प्रक्रिया शुरू करेगा और सब्सिडी जारी करने के लिए आवश्यक दस्तावेज नाबार्ड को भेजेगा। ऋण संसाधित होते ही EMI शुरू हो जाएगी लेकिन नाबार्ड के माध्यम से सब्सिडी जारी करने में कुछ समय लगता है। इसके साथ ही सब्सिडी पर कोई ब्याज दर लागू नहीं होती है।
  • इसके अलावा अगर बैंक को लगता है या जानकारी मिलती है कि सब्सिडी का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो छानबीन करने के बाद बैंक इसे बंद कर सकते हैं।

Solar system स्थापित करने पर लगने वाले खर्च को ध्यान में रखते हुए, मिशन का मुख्य उद्देश्य subsidy scheme की पेशकश करना है ताकि कम पूंजीगत लागत पर solar energy systems प्राप्त करने में व्यक्तियों और संगठनों दोनों को मदद मिल सके। नाबार्ड की मदद से इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) द्वारा इस योजना को लागू किया गया है। 15 मार्च 2012 को योजना के संशोधन के बाद, यह घोषित किया गया है कि भारत के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थित इकाइयों के लिए Solar PV system की पूंजीगत लागत पर 40% सब्सिडी दी जाएगी।

योजना के तहत तीन मुख्य घटक

Component A

  • इस योजना के तहत श्रमिक 10,000 मेगावाट विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा बिजली संयंत्र स्थापित करेंगे जो बंजर भूमि पर ग्रिड से जुड़े होंगे।
  • जानकारी के अनुसार, ये सभी ग्रिड किसानों/सहकारी समितियों/किसानों के समूहों/पंचायतों/जल उपयोगकर्ता संघों (WUA) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) द्वारा स्थापित किए जाएंगे।
  • इसके साथ ही Sub-station के 5 किमी के दायरे में विद्युत परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।

Component B

  • इस योजना के तहत, किसानों को 17.50 लाख रुपये के स्टैंड-अलोन solar agriculture pumps स्थापित करने के लिए सहायता दी जाएगी।
  • मौजूदा diesel agriculture pumps को बदलने के लिए पंपों की क्षमता 7.5 एचपी तक होगी।
  • पम्पों की क्षमता 7.5 एचपी से अधिक हो सकती है लेकिन वित्तीय सहायता केवल 7.5 एचपी क्षमता तक ही प्रदान की जाएगी।

Component C

  • यह योजना 10 लाख ग्रिड से जुड़े Agriculture Pumps के solarisation के लिए है और व्यक्तिगत किसानों को उन पंपों को solarize करने के लिए सहायता दी जाएगी जिनके पास ग्रिड से जुड़े पंप हैं।
  • भारत की वितरण कंपनियों (DISCOMs) को पूर्व-निर्धारित टैरिफ पर Extrasolar power बेची जाएगी।
  • इसके अलावा उत्पन्न सौर ऊर्जा के उपयोग से किसान की सिंचाई की जरूरत पूरी की जाएगी।
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